सियासी जाम में फंसी बसें, प्रियंका बोलीं- एंट्री मिलती तो 92 हजार लोग घर पहुंच जाते

सियासी जाम में फंसी बसें, प्रियंका बोलीं- एंट्री मिलती तो 92 हजार लोग घर पहुंच जाते

प्रियंका गांधी ने कहा कि मंगलवार को गाजियाबाद बॉर्डर पर बसें खड़ी थीं, लेकिन उन्हें परमिशन नहीं दी गई. बसें आज भी वहां खड़ी हैं, सरकार को उन्हें चलाने की इजाजत देनी चाहिए ताकि श्रमिकों की मदद की जा सके.

  • प्रियंका ने फिर की बसों को चलाने की अपील

  • यूपी में बस पॉलिटिक्स पर घमासान जारी है

उत्तर प्रदेश में श्रमिकों के नाम पर चलने वाली बसें सियासी जाम में फंस गई हैं. कांग्रेस और योगी सरकार में खींचतान जारी है. कांग्रेस की बसों को राज्य में एंट्री नहीं दिए जाने पर पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने बुधवार को फिर मजदूरों के लिए बसों की अनुमति देने की अपील की. उन्होंने कहा कि भले बसों पर बीजेपी अपने पोस्टर लगाए, या खुद कहे कि उसने बसें चलाई हैं, हमें इससे कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन मजदूरों की मदद करे.

प्रियंका गांधी ने कहा कि मंगलवार को गाजियाबाद बॉर्डर पर बसें खड़ी थीं, लेकिन उन्हें परमिशन नहीं दी गई. बसें आज भी वहां खड़ी हैं, सरकार को उन्हें चलाने की इजाजत देनी चाहिए ताकि श्रमिकों की मदद की जा सके. एक हजार बसों में जो सरकार को चलने लायक लगती हैं, कम से कम वही शुरू की जाएं. अगर इन दो दिनों में बसें चली होतीं तो 92 हजार लोग घर पहुंच चुके होते.

प्रियंका गांधी ने कहा कि हम सबको अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी. मजदूरों के खून-पसीने से देश चलता है. ये वक्त राजनीति का नहीं बल्कि मजदूरों की मदद का है. काफी समय से प्रवासी भाई-बहन विषम परिस्थितियों में, कड़ी धूप में, बगैर खाए पैदल अपने गांव की ओर चल रहे हैं. ये लोग देशभर से आ रहे हैं. कई बहनें गर्भवती होने के बावजूद पैदल चल रही हैं. कई लोग बच्चों को गोद में लेकर जा रहे हैं.

प्रियंका ने कहा कि हम मदद करना चाहते हैं. हमने सकारात्मक और सेवा भाव से ही मुख्यमंत्री को एक हजार बस भेजना की बात कही थी. हमने उनके अच्छे कदमों का स्वागत भी किया. अगले दिन मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि यूपी रोडवेज की 12000 बसें हैं, आपकी बसों की जरूरत नहीं है. हमने 17 मई को गाजियाबाद में खड़ी 500 बसों को वापस भेज दिया.

खाली बस भेजना, मकसद को खत्म करने जैसा था

प्रियंका ने कहा कि अगले दिन पत्र के जरिए उन्होंने हमसे बस, ड्राइवर, कंडक्टर की सूची मांगी. हमने उनके पत्र के 4-5 घंटे के अंदर ही बसों की लिस्ट उपलब्ध करवा दी. रात को साढ़े 11 बजे पत्र के जरिए उन्होंने सुबह 10 बजे तक 1000 बसों को लखनऊ पहुंचाने के लिए कहा. प्रियंका ने कहा कि दिल्ली में खड़ी हमारी बसों का मकसद दिल्ली एनसीआर, नोएडा, गाजियाबाद से पैदल जा रहे मजदूरों को घर पहुंचाना था. ऐसे में दिल्ली से लखनऊ तक इन बसों का खाली चलना मकसद को खत्म करने जैसा था.

बसों का इस्तेमाल नहीं करेंगे तो भेज देंग वापस

प्रियंका ने कहा कि मेरा मुख्यमंत्री से इतना ही आग्रह है कि इन बसों को इस्तेमाल करना है तो कीजिए, अगर इस्तेमाल नहीं करना तो हम इन्हें वापस भेज देंगे, जैसे तीन दिन पहले आपके ऐलान के बाद भेजा था. प्रियंका ने कहा कि जिस तरह से हम लोगों की मदद कर रहे हैं, वो उसी तरह करते रहेंगे. हमें इससे फर्क नहीं पड़ता कि आपकी बसें हैं या हमारी. हम सिर्फ सेवा भाव से मदद करना चाह रहे हैं.

उन्होंने कहा कि सेवा भाव से ही यूपी कांग्रेस ने लॉकडाउन के अगले दिन हर जिले में “कांग्रेस के सिपाही” नाम से वॉलंटियर ग्रुप बनाए. हमने हर जिले में हेल्पलाइन नंबर जारी किए. इसके अलावा हमने “सांझी रसोइयां” खोलीं, हाइवे टास्क फोर्स बनाए. इन कार्यों के जरिए हमने 67 लाख लोगों की मदद की. इनमें से 60 लाख लोग यूपी में और 7 लाख बाहर फंसे हुए थे. हम सेंट्रल हेल्पलाइन के जरिए भी लगातार सामंजस्य स्थापित कर रहे हैं.

Source: AajTak